Sunday, 12 February 2017

कवि की पहिचान

देश,परिस्थिति और काल का
जिसको रहता ज्ञान,
साहस, शोर्य जगाने का ही, जो करता अभियान l
वैसे तो वह सरल प्रकृति का,
प्राणी है पर-
कवि मिटता है आन,वान पर
यह उस पहिचान l
डॉ हरिमोहनगुप्त

No comments:

Post a Comment