Wednesday, 25 April 2018


आशा फलती उन्हीं की, जिनको है सन्तोष, जो प्रयासरत ही रहें, भरते हैं वे कोष l मानव की पीड़ा हरें, वे ही पाते मान, सेवा धर्म प्रधान है, तब बनती पहिचान l

Friday, 20 April 2018


सिया राम मय जगत है,जन जन का आधार, मिथ्या सब संसार है, प्राणी यह है सार l सिया राम मय जगत है,जन जन का आधार, मिथ्या सब संसार है, प्राणी यह है सार l

Thursday, 19 April 2018


जो सोचते हैं जग भला,तो हुआ उनका भला, मन मिलेंगे दूर होगा, दूरियों का सिलसिला l आपसी सद भाव का जो पाठ पढ़ते सर्वदा, देश हित में सोचते, सम्मान उनको ही मिला l

Wednesday, 18 April 2018


कुछ बातें हैं काम की, इनको करिये रोज, उसका फल फिर देखिये, आप मनाएं मौज. स्वच्छ वस्त्र पहिनो सदा, आसन भी हो स्वच्छ, बस सुगन्ध हो पास में, स्वच्छ सदा हो कक्ष. बच्चों के संग खेलिए, इतना रखिये ध्यान, उन्हें जिताओ हार कर, सदा बढ़ेगा मान. कभी दीन के संग भी, भोजन हो स्वीकार, आप आत्म सुख पायगें, बहे नेह की धार. जमा समय से बिल करो, रहो समय पाबन्द, पाँच मिनट आगे घड़ी- रखो, रहो सानन्द.

Tuesday, 17 April 2018


आपस में सौहार्द बढाता है अपनापन, आपस में सद्भाव जगाता है निज चिन्तन, वैचारिक मतभेद कभी भी हो सकते हैं, यदि होगा मनभेद, नष्ट होता है जीवन.

Monday, 16 April 2018


आयु होती क्षीण, यदि निन्दा करें विद्वान की, तप नष्ट होता जायेगा, यदि मान्यता अभिमान की l झूठ बोला तो समझ लो, नष्ट होगा यज्ञ फल, दूसरों से यदि कही, महिमा कहाँ फिर दान की

मन में जब भी दूरी बढती, तो उसका परिणाम कलह है, तिरिस्कार जब भी मिलता है, उसकी कोई रही बजह है l माना यह सबको समझोते, करना पड़ते हैं जीवन में, इनसे जो ऊपर उठ जाता, उसकी अपनी स्वयम जगह है l

Sunday, 15 April 2018


योग ऐश औ आराम से जीवन कटे, यह भोग है, असंतुलित भोजन करें परिणाम इसका रोग है l परमात्मा से मन सहज हम जोड़ कर देखें सही, स्वस्थ हो तन मन हमारा,बस यही तो योग है l 42 जीवन का यदि सम्यक ढंग से करना है उपयोग, अल्पाहारी, संग में निद्रा, करें आप उपयोग l हम शतायु की सोचें मन में, रहना हमें निरोग, स्वास्थलाभ संग,मन प्रसन्न हो,नियमित करिये योग l

Saturday, 14 April 2018


वे दोनों तो ऐक हैं, क्या रहीम क्या राम, हम में ही दुर्बुद्धि है, इसीलिये कुहराम l मिटटी की यह देह है, सब में ज्योति समान, क्या हिन्दू, क्या मुसलमा, क्यों होते हैरान l

Saturday, 31 March 2018


अंधे देखें कृपा से, मूक बनें वाचाल, राम कृपा से पंगु भी,गिरिवर चढ़ें विशाल l जिसकी जैसी भावना, वैसे उसके राम, श्रृद्धा हम उन पर करें,बिगड़े बनते काम l